जीवन परिचय
मुनिश्री द्वारा प्रवर्तित ‘शंका-समाधान’ कार्यक्रम किसी भी जैन सन्त द्वारा टी.वी. चैनल पर प्रसारित होने वाला ऐसा प्रथम कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से सर्वसाधारण जन सीधे मुनिश्री से जुड़कर अपने धर्म और जीवन व्यवहार से जुड़ी जटिलतम शंकाओं का त्वरित और सटीक समाधान पाकर अभिभूत हो जाते हैं। मुनिश्री अपनी अनुभवप्रसूत-वाणी से मानव जीवन की सभी जटिलतम गुत्थियों को पल भर में ही खोल देते हैं, यही कारण है कि अपने आरम्भकाल से लेकर आज तक इस कार्यक्रम की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इसके लाखों दर्शक प्रतिदिन अपने परिवार सहित समय से पूर्व ही टी.व्ही. पर पारस चैनल लगाकर बैठ जाते हैं। ‘शंका-समाधान’ का यह कार्यक्रम विभिन्न संचार माध्यमों के द्वारा प्रतिदिन देखा/सुना जा सकता है। अब तक हजारों लोगों ने इस कार्यक्रम से जुड़कर अपने जीवन की दिशा और दशा में सकारात्मक परिवर्तन घटित करते हुए जीवन को आनन्ददायक और सोद्देश्य बनाया है।
माननीय राजस्थान उच्चन्यायालय द्वारा जैन साधना के प्रधान अंग सल्लेखना/संथारा को आत्महत्या निरूपित करते हुए दिए गए स्थगन-आदेश के बाद मुनिश्री ने ‘धर्म बचाओ आन्दोलन’ का सूत्रपात करके जैन संस्कृति पर बहुत बड़ा उपकार किया है। मुनिश्री के आह्वान पर 24अगस्त 2015 को सम्पूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ विदेशों में भी एक समय में एक परिधान में एक करोड़ से अधिक लोगों ने मौनप्रदर्शन किया। मुनिश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि सल्लेखना आत्महत्या नहीं है, यह तो मृत्यु के अवश्यंभावी हो जाने की स्थिति में जैन साधना पद्धति के अन्तर्गत साधक द्वारा अपनी साधना के बल पर मृत्यु के भय और कष्ट से ऊपर उठते हुए; साक्षीभाव से उसके अभिनन्दन की अनूठी परम्परा एवं दुर्लभ कला है। ‘धर्म बचाओ आन्दोलन’ के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पश्चात् माननीय उच्चतम न्यायालय ने सल्लेखना पर दिए गए स्थगन-आदेश पर अन्तरिम रोक लगा दी है।

